About Us

आदरणीय सजातीय स्वजन,

        

                ’’दसा श्रीमाली वेलफेयर सोसायटी’’ का दसा श्रीमाली समाज की सेवा और कल्याण के लिए रजिस्ट्रेशन हो चुका है तथा समस्त समाजजन के सहकार से सेवा-कल्याण हेतु कार्य करने के लिए तत्परता है ।

                हमारे समाजजन आज विभिन्न स्थानांे पर निवासरत होकर स्थान विशेष पर प्रचलित आचार-विचार, सामयिक रीति रिवाजों से प्रेरित होकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं । कहीं कहीं हम श्रीमाल, श्रीमाली, गुप्ता, गुजराती, जैन आदि के नाम से जाने जाते हैं फिर भी हम सब एक ही हैं और आपस में रिश्तेदारी में एक दूसरे के अटूट सम्बन्धी भी हैं ।  अस्तु  ।

                यद्यपि हमारे कुल, गोत्र अलग अलग होते हैं और इस तरह पूर्वजों के व्दारा ही हमारे रीति रिवाजों का निर्धारण भी किया गया है जो हम पालन कर अपनी जीवनयात्रा चलाते हैं ।  सर्वप्रथम हमारा धर्म, यदि हम पूर्वजों की बात करें तो वह सनातन धर्म ही रहा है तथा बाद में जैन आदि धर्म का उदय हुआ है और जो

धारण किया जाय वही धर्म कहलाता है  तथा स्थान, समय व अपने निवासस्थल पर जो अधिकतम रूप से प्रचलित होता है हम मान्य कर अंगीकार कर लेते हेैं ।   किन्तु, यहां यह उल्लेखनीय है कि हम कहींे भी रहें एकजूट रहें तथा आपसी सामंजस्य बना रहे ं।  हमारे लिये यह भी अत्यन्त आवश्यक है कि पूर्वजों व्दारा

निर्धारित रीति रिवाजों का पालन भी करते रहें तो हमारे पितृगण भी हमारे जीवन में सहायक होते हैं ।  समस्त समाज के लिए एक संहिता का निर्माण भी किया जा रहा है जिसमें सभी प्रचलित रीति रिवाजों का समावेश किया जा रहा है आपकी ओर से भी जानकारी अपेक्षित है ताकि उसे समाहित किया जाकर पूर्णता पर विचारार्थ तथा सर्वमान्यता हेतु भेजा जा सके और सर्वानुमति से तैयार किया जाकर एकरूपता हेतु प्रयास किया जा सके जिससे हर स्थान पर उन्ही रिवाजों के अनुरूप कार्य पूर्ण किये जा सकें और किसी प्रकार की कोई दुविधा न रहे ।

                समाज की प्रगति हेतु विभिन्न सेवा कार्य की रूपरेखा बनाई जा चुकी है और जैसे जैसे हमारी सदस्य संख्या में वृध्दि होती जायेगी, की जानकारी समस्त सदस्यों को प्रदान की जाती रहेगी ।  सभी सदस्यगण से समाज हित के कार्यो के लिए समय समय पर सुझाव भी आंमंत्रित किये जावेगे और यथोचित निर्णय लिये  जाकर समाज कल्याण हेतु नवीन सोपानों की रचना की जावेगी ।  यहाॅ यह उल्लेखित किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है कि यह सोसायटी या पदाधिकारीगण किसी भी प्रकार से केन्द्रीय कार्यकारिणी की भूमिका में अपना हस्तक्षेप नहीं करेगे तथा  आवश्यकता पड़ने पर योग्य सहायता प्रदान सदस्यों की सहमति से अवश्य ही करती रहेगे ।  समस्त शासकीय नियमों उपनियमों का पालन पूर्ण रूप से किया जावेगा ।

                मेरा आप सबसे यह भी निवेदन है कि जो हमारी सोसायटी दसा श्रीमाली वेलफेयर सोसायटी का गठन हुआ है केवल सामाजिक कल्याणार्थ ही ह,ै के सहभागी भी बनें सदस्यता ग्रहण करें जिससे असहज परिस्थितियों में समाजजन को सहयोग करते हुए नवीन ऊंचाइर्याें की ओर समाज को ले जा सकें ।  सदस्यता आवेदन पूर्व से ही अग्रेषित हैं और आवश्यक हो तो उपलब्ध भी करवाये जा सकते है ।  अतः उचित समझें तोे सदस्यता हेतु सहभागिता करें ।

                आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि समाज उत्थान हेतु सहभागिता अवश्य करेंगे ।